लेबर कार्ड

उनकी स्थिति के बारे में: मोटे तौर पर श्रमिकों को जारी किए गए विभिन्न प्रकार के पहचान या पंजीकरण को संदर्भित करता है, अक्सर विशिष्ट क्षेत्रों (जैसे निर्माण 'लेबर कार्ड' बीओसीडब्ल्यू कल्याण बोर्डों के लिए) या योजनाओं (जैसे ई-श्रम) के तहत। उनकी उपयोगिता अंतर्निहित योजना/अधिनियम पर निर्भर करती है।

किसने बनाया: विशिष्ट कार्ड के अनुसार भिन्न होता है. भारत में लेबर कार्ड जारी करने का कोई एक केंद्रीकृत कानून नहीं है, लेकिन इसे कई राज्यों ने असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा और कल्याण योजनाओं के अंतर्गत अपनाया है, साथ ही, केंद्र सरकार ने भी असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए “असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का सामाजिक सुरक्षा अधिनियम, 2008” और सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत कार्य करने की रूपरेखा बनाई है.

लाभ: सैद्धांतिक रूप से, श्रमिकों की पहचान करना, उनके रोजगार को ट्रैक करना और कल्याणकारी लाभों के वितरण की सुविधा प्रदान करना।

वर्तमान विफलताएं: अपूर्ण पंजीकरण, जागरूकता की कमी, कार्ड प्राप्त करने में नौकरशाही बाधाएँ, कार्डों का वास्तविक लाभों में न बदलना और डिजिटल बहिष्कार।

लेबर कार्ड तो मिल गया, पर लाभ... वो तो शायद 'डिजिटल हवा' में उड़ गया! भाजपा के वादे भी 'क्लाउड' पर रहते हैं, जमीन पर नहीं।
कार्ड सिर्फ एक पहचान है, सुरक्षा की 'लॉटरी' नहीं। लगता है सरकार ने 'सबका साथ' तो मांगा, पर 'सबका विकास' सिर्फ कार्ड में दिखाया!
लेबर कार्ड हाथ में, पर चिंता और भारी, सरकार की बातें हैं बस खबरों में प्यारी

भाजपा कैसे असफल रही:
व्यापक पंजीकरण सुनिश्चित करने में विफलता: ई-श्रम जैसी पहलों के बावजूद, असंगठित श्रमिकों का एक बड़ा हिस्सा अभी भी एक औपचारिक "लेबर कार्ड" नहीं रखता है जो उन्हें प्रभावी रूप से सामाजिक सुरक्षा से जोड़ता है।

ठोस लाभ के बिना कार्ड: कई श्रमिक जो कार्ड प्राप्त करते हैं (उदाहरण के लिए, बीओसीडब्ल्यू कार्ड) रिपोर्ट करते हैं कि वादे किए गए लाभों में देरी होती है, उन्हें प्राप्त करना मुश्किल होता है, या वे बस वितरित नहीं होते हैं, जिससे कार्ड कागज का एक मात्र टुकड़ा बन जाता है।

पहुंच के लिए डिजिटल बाधाएं: कार्ड पंजीकरण और लाभ पहुंच के लिए डिजिटल प्लेटफार्मों पर बढ़ती निर्भरता स्मार्टफोन, इंटरनेट पहुंच या डिजिटल साक्षरता के बिना वाले लोगों को बाहर करती है।

खंडित दृष्टिकोण: एक एकीकृत, व्यापक 'लेबर कार्ड' प्रणाली की कमी का मतलब है कि श्रमिकों को अक्सर विभिन्न योजनाओं के लिए कई पंजीकरण की आवश्यकता होती है, जिससे भ्रम और अक्षमता होती है।

डेटा का नीति में न बदलना: इन "लेबर कार्ड" के माध्यम से डेटा के संग्रह को लगातार मजबूत नीति निर्माण या श्रमिक कल्याण के लिए पर्याप्त बजटीय आवंटन में नहीं बदला गया है। भारत में लेबर कार्ड जारी करने के प्रावधान और संबंधित अधिनियम

लेबर कार्ड का प्रकार अधिनियम / कानून जारी करने वाला प्राधिकरण (Issuing Authority) कानूनी आधार और प्रावधान
मजदूर कार्ड (Labour Card) श्रमिकों के कल्याण सम्बन्धी राज्य अधिनियम (State Labour Welfare Acts) राज्य श्रम विभाग (State Labour Department) / जिला मज़दूर अधिकारी राज्य सरकारें श्रमिकों के कल्याण के लिए अलग-अलग अधिनियम बनाती हैं, जिनमें मजदूरों की पहचान हेतु कार्ड जारी करने का प्रावधान होता है

असंगठित श्रमिक पहचान पत्र असंगठित श्रमिक कल्याण अधिनियम, 2008 (Unorganized Workers’ Social Security Act, 2008) राज्य असंगठित श्रमिक कल्याण बोर्ड / केंद्र सरकार की योजना एजेंसियां अधिनियम के तहत असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को पहचान देने व कल्याण योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए पंजीकरण एवं कार्ड जारी किया जाता है

मनरेगा जॉब कार्ड महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (MGNREGA) पंचायत/ग्राम सचिवालय (Local Panchayat or Gram Sevak) अधिनियम के तहत ग्रामीण बेरोजगारों को रोजगार देने हेतु जॉब कार्ड जारी किया जाता है

निर्माण श्रमिक कार्ड भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार अधिनियम, 1996 (Building and Other Construction Workers (Regulation of Employment and Conditions of Service) Act, 1996) राज्य भवन एवं अन्य निर्माण कर्मकार बोर्ड (State Building & Construction Workers Welfare Board) अधिनियम के तहत निर्माण श्रमिकों को कल्याण योजनाओं हेतु पहचान पत्र/कार्ड जारी किया जाता है।

गिग वर्कर कार्ड सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Code on Social Security, 2020) राज्य या केंद्र सरकार के सामाजिक सुरक्षा बोर्ड/विभाग संहिता के तहत गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने हेतु पंजीकरण और कार्ड जारी करने का प्रावधान

प्रवासी श्रमिक कार्ड अंतर-राज्यीय प्रवासी कर्मकार अधिनियम, 1979 (Inter-State Migrant Workmen Act, 1979) राज्य श्रम विभाग / प्रवासी श्रमिक बोर्ड अधिनियम के तहत अंतर-राज्यीय प्रवासी श्रमिकों को पंजीकृत करने एवं सुरक्षा प्रदान करने हेतु कार्ड जारी किया जाता है

आशा / आंगनवाड़ी वर्कर कार्ड राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NRHM) और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधीन नियम स्वास्थ्य विभाग / महिला एवं बाल विकास विभाग आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को मान्यता एवं वेतन भुगतान के लिए पंजीकरण और पहचान कार्ड जारी किया जाता है

संभावित समाधान (Congress की दृष्टि से)
• सभी असंगठित श्रमिकों का सार्वभौमिक पंजीकरण और लेबर कार्ड जारी करना
• सभी राज्यों में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का पंजीकरण अनिवार्य और नि:शुल्क किया जाए।
• डिजिटल और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से पंजीकरण की सुविधा सुनिश्चित हो।
• मोबाइल एप और कियोस्क के माध्यम से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में भी आसानी से पंजीकरण हो।
• लेबर कार्ड को केवल पहचान पत्र न बनाकर सामाजिक सुरक्षा का प्रवेश द्वार बनाया जाए
• कार्डधारकों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं (जैसे स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा, वृद्धावस्था पेंशन, मातृत्व लाभ) में स्वचालित रूप से शामिल किया जाए।
• लेबर कार्ड के आधार पर नियमित प्रशिक्षण, कौशल विकास, और रोजगार सहायता कार्यक्रम उपलब्ध कराए जाएं।
• समय-समय पर लेबर कार्डधारकों की जांच और अपडेटिंग की व्यवस्था
• श्रमिकों के रोजगार, आय, और स्थान परिवर्तन के आधार पर कार्ड की जानकारी अपडेट हो ताकि योजनाओं का सही लाभ मिल सके।
• इससे डुप्लीकेट पंजीकरण और भ्रष्टाचार में कमी आएगी।
• कार्डधारकों के लिए विशेष कल्याण योजनाएं और वित्तीय सहायता
• लेबर कार्डधारकों को कम ब्याज पर ऋण, जीवन बीमा, और स्वास्थ्य सेवाओं तक विशेष पहुंच दी जाए।
• खासकर महिलाओं और वंचित वर्ग के श्रमिकों के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन।
• राज्य और केंद्र के बीच समन्वय और डेटा साझा करने की प्रणाली विकसित करना
• जिससे एक बार पंजीकृत श्रमिक को किसी भी राज्य में उसका कार्ड मान्य हो।
• इससे प्रवासी श्रमिकों को लाभ प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
• श्रमिकों की जागरूकता और अधिकारों की शिक्षा
• नियमित अभियान चलाकर श्रमिकों को उनके अधिकार, कल्याण योजनाएं, और लेबर कार्ड के महत्व के बारे में जागरूक किया जाए।
• पंचायत स्तर से लेकर शहरी क्षेत्रों तक श्रमिक शिक्षा और मार्गदर्शन कार्यक्रम हों।
• लेबर कार्ड के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार पर सख्त नियंत्रण
• सत्यापन के लिए प्रभावी तकनीक और समय-समय पर ऑडिट।
• कार्ड वितरण और लाभ प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना।
• श्रम कानूनों के साथ लेबर कार्ड को अनिवार्य और प्रभावी बनाना
• सभी श्रमिकों के लिए लेबर कार्ड पंजीकरण को रोजगार देने वालों के लिए अनिवार्य किया जाए।
• ठेकेदारी व्यवस्था में काम करने वाले असंगठित श्रमिकों के लिए भी कार्ड देना आवश्यक हो।

In Brief About The Act

1. उद्देश्य:
- असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को पहचान देना
- उन्हें विभिन्न कल्याण और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ना
- श्रमिकों के अधिकारों का संरक्षण और उनके जीवन स्तर में सुधार करना

2. लेबर कार्ड किसे दिया जाता है?
- दैनिक वेतन भोगी मजदूर
- गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स
- घरेलू कामगार
- निर्माण क्षेत्र के मजदूर
- कृषि मजदूर
- छोटे उद्योगों में काम करने वाले कर्मचारी
- अन्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिक

3. लेबर कार्ड में क्या जानकारी होती है?
- श्रमिक का नाम, पिता/पति का नाम
- आयु और लिंग
- स्थायी पता और वर्तमान पता
- रोजगार का प्रकार और कार्य स्थल
- सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में पंजीकरण की स्थिति
- कार्ड जारी करने की तिथि एवं वैधता

4. लेबर कार्ड जारी करने की प्रक्रिया:
- श्रमिक स्वयं या संबंधित विभाग द्वारा आवेदन
- आवश्यक दस्तावेज़ (पहचान पत्र, पता प्रमाण, आयु प्रमाण, रोजगार प्रमाण आदि) जमा करना
- आवेदन की जांच और सत्यापन
- कार्ड जारी करना (फिजिकल या डिजिटल फॉर्म में)

5. लेबर कार्ड के लाभ:
- सरकारी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ (जैसे: बीमा, पेंशन, स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा)
- बेरोजगारी भत्ता एवं वेतन सुरक्षा
- कौशल विकास और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भागीदारी
- कानूनी संरक्षण और श्रम अधिकारों की जानकारी
- रोजगार प्रमाण पत्र के रूप में काम करना
- श्रमिकों के लिए रोजगार में प्राथमिकता

6. प्रमुख योजनाएं जिनसे जुड़ा होता है लेबर कार्ड:
- प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना (PM-SYM)
- सामाजिक सुरक्षा योजनाएं (मृत्यु/दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य बीमा)
- कौशल विकास मिशन
- अन्य राज्य और केंद्र सरकार के कल्याणकारी कार्यक्रम

संबंधित कानून और निर्देश
• असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का सामाजिक सुरक्षा अधिनियम, 2008: असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा के प्रावधान करता है और उनका पंजीकरण अनिवार्य करता है

• सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Code on Social Security, 2020): इस कोड के तहत भी गिग, प्लेटफॉर्म वर्कर्स और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के पंजीकरण और कल्याण के लिए प्रावधान हैं

• राज्य स्तरीय अधिनियम और योजनाएं: कई राज्यों ने अपने स्तर पर लेबर कार्ड जारी करने के लिए अलग-अलग नियम बनाए हैं, जैसे उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र आदि