ठेका श्रम (विनियमन और उत्सादन) अधिनियम, 1970

अधिनियम के बारे में: कुछ प्रतिष्ठानों में ठेका श्रम के रोजगार को विनियमित करने और कुछ परिस्थितियों में इसके उन्मूलन के लिए और उससे जुड़े मामलों के लिए अधिनियमित किया गया।

किसने बनाया: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा बनाया गया था ( इंदिरा गांधी सरकार)

लाभ: ठेका श्रम के शोषण को रोकने और यह सुनिश्चित करने का लक्ष्य था कि उन्हें नियमित कर्मचारियों के समान निष्पक्ष मजदूरी और काम करने की स्थिति मिले, खासकर मुख्य गतिविधियों में।

संशोधन (भाजपा के तहत): भाजपा सरकार ने इस अधिनियम को औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के तहत शामिल करने का प्रस्ताव किया है। आलोचक तर्क देते हैं कि यह उन्मूलन के मूल इरादे को कमजोर करेगा और नियोक्ताओं को ठेका श्रम का उपयोग करने के लिए अधिक लचीलापन प्रदान करेगा।

वर्तमान विफलताएं: नियमित रोजगार से बचने के लिए नियोक्ताओं द्वारा व्यापक दुरुपयोग, विनियमों का खराब प्रवर्तन, ठेका श्रमिकों के लिए कम मजदूरी और "समान या समान काम" साबित करने में कठिनाई।

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भाजपा कैसे असफल रही:
ठेका श्रम को बढ़ावा देना: भाजपा सरकार की नीतियां और नए श्रम संहिता सक्रिय रूप से ठेका श्रम को बढ़ावा दे रहे हैं, प्रतिबंधों को कम करके, बजाय इसके कि इसे मुख्य गतिविधियों में विनियमित या समाप्त किया जाए।

उन्मूलन प्रावधानों का कमजोर होना: नए संहिता उद्योगों के लिए बारहमासी और मुख्य गतिविधियों में ठेका श्रम को काम पर रखना आसान बनाते हैं, जिससे 1970 के अधिनियम का प्रगतिशील इरादा उलट जाता है।

कमजोर प्रवर्तन और निरीक्षण: मौजूदा विनियमों का प्रवर्तन कमजोर रहा है, जिससे नियोक्ताओं को खामियों का फायदा उठाने और ठेका श्रमिकों को उनके अधिकारों से वंचित करने की अनुमति मिलती है।

बढ़ती अनिश्चितता: सरकार के दृष्टिकोण से काम की अनिश्चितता में वृद्धि हुई है, जिससे अधिक श्रमिकों को पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा या नौकरी स्थिरता के बिना संविदात्मक व्यवस्था में धकेला जा रहा है।

संभावित समाधान (Congress की दृष्टि से)

1. अधिनियम का सख्ती से कार्यान्वयन और पुनर्जीवन
• ठेका श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी, कार्यघंटे, स्वास्थ्य, सुरक्षा, छुट्टी और सामाजिक सुरक्षा की समान गारंटी सुनिश्चित हो।
• राज्य श्रम विभागों को अधिक जनशक्ति और तकनीकी संसाधन दिए जाएं ताकि निरीक्षण प्रभावी हो सके।

2. समान कार्य के लिए समान वेतन
• ठेका श्रमिक और नियमित कर्मचारी यदि एक ही प्रकार का कार्य करते हैं तो उन्हें समान वेतन, सुविधाएं और अधिकार मिलें, यह सुनिश्चित किया जाए।
• सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों के अनुसार ठेका श्रमिकों को भेदभाव से मुक्त वातावरण मिले।

3. श्रम अनुबंधों की पारदर्शिता और निगरानी
• सभी कांट्रैक्टर्स और नियोक्ताओं को डिजिटल पोर्टल पर पंजीकृत करना अनिवार्य किया जाए।
• ठेका श्रमिकों का विवरण, नियुक्ति की अवधि, वेतन और बीमा की जानकारी ई-श्रम पोर्टल से जोड़ी जाए।

4. ठेका प्रथा के दुरुपयोग पर रोक
• सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में उन कार्यों में ठेका प्रथा पर रोक लगाई जाए जो निरंतर प्रकृति के हैं।
• “कृत्रिम ठेका” (जहाँ स्थायी काम के लिए ठेका मज़दूर रखे जाते हैं) पर कानूनी कार्यवाही की जाए।

5. ठेका प्रथा का उन्मूलन (जहाँ संभव हो)
• चरणबद्ध ढंग से उन विभागों में ठेका प्रथा को समाप्त किया जाए जहाँ नियमित नियुक्ति संभव है — जैसे सफाई, सुरक्षा, रसोई, निर्माण इत्यादि।
• सभी सरकारी एवं सार्वजनिक उपक्रमों में स्थायी रोजगार नीति लाई जाए।

6. सामाजिक सुरक्षा और लाभों का एकीकरण
• ठेका श्रमिकों को ESIC, PF, स्वास्थ्य बीमा, बीमा पॉलिसी, बोनस, और ग्रेच्युटी जैसी योजनाओं का पूर्ण लाभ मिले।
• उनके कल्याण के लिए अलग कल्याण बोर्ड स्थापित किया जाए।

7. महिला ठेका श्रमिकों की विशेष सुरक्षा
• महिला ठेका श्रमिकों को मातृत्व लाभ, क्रेच सुविधा, कार्यस्थल पर सुरक्षा और यौन उत्पीड़न से संरक्षण दिया जाए।
• रात्रिकालीन कार्यों में महिलाओं के लिए विशेष सुरक्षा मानदंड अनिवार्य हों।

8. श्रमिक यूनियनों को मज़बूत करना
• ठेका श्रमिकों को ट्रेड यूनियन का हिस्सा बनने और सामूहिक सौदेबाजी करने का पूर्ण संवैधानिक अधिकार मिले।
• यूनियन को मान्यता की प्रक्रिया सरल और बाधारहित हो।