अधिनियम के बारे में: 2005 में यूपीए सरकार द्वारा अधिनियमित, मनरेगा एक सामाजिक सुरक्षा उपाय है जो किसी भी ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों को एक वित्तीय वर्ष में 100 दिनों के लिए मजदूरी रोजगार की गारंटी देता है, जो अकुशल शारीरिक काम करने के इच्छुक हों। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका सुरक्षा बढ़ाना, सूखे से निपटना और ग्रामीण संपत्ति का निर्माण करना है।
किसने बनाया: प्रधान मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार।
लाभ: इसने काम की कानूनी गारंटी प्रदान की, आर्थिक मंदी के दौरान एक सुरक्षा जाल के रूप में कार्य किया, संकटग्रस्त प्रवासन को कम किया, महिलाओं को सशक्त बनाया और ग्रामीण बुनियादी ढाँचा तैयार किया।
संशोधन (भाजपा के तहत): हालाँकि कोई बड़ा संरचनात्मक संशोधन नहीं किया गया है, भाजपा सरकार पर प्रशासनिक परिवर्तनों और बजट कटौती के माध्यम से परिचालन संशोधन का आरोप लगाया गया है, जिससे अधिनियम की भावना प्रभावी ढंग से कमजोर हुई है।
वर्तमान विफलताएं: समय पर मजदूरी भुगतान, पर्याप्त बजट आवंटन, प्रशासनिक बाधाएँ और मांग-आधारित प्रकृति कभी-कभी काम की आपूर्ति द्वारा पूरी नहीं होती।
27 फरवरी 2015 (बजट सत्र के दौरान) - मोदी जी ने संसद में मनरेगा का मज़ाक उड़ाया, कहा – "यह गड्ढा खोदने की योजना है"
2020 में लॉकडाउन आया तो उसी मनरेगा ने करोड़ों भूखे परिवारों को सहारा दिया
जिसे कोसा, उसी ने देश को संभाला
यही है कांग्रेस की दूरदर्शिता
(मनरेगा कांग्रेस की दूरदर्शी सोच का परिणाम है. यह योजना केवल गरीबी उन्मूलन का औजार नहीं, बल्कि आर्थिक संकट में देश के गरीबों की ढाल है. भाजपा सरकार ने भी जब संकट आया, तो उसी योजना के सहारे देश को संभाला – इससे मनरेगा की मजबूती सिद्ध होती है.)
भाजपा कैसे असफल रही:
• लगातार कम फंडिंग: मांग की तुलना में बजट आवंटन में जानबूझकर कमी, जिससे नौकरी की कमी और काम की अपूर्ण मांग हुई।
• विलंबित मजदूरी भुगतान: मजदूरी वितरण में पुरानी देरी, जिससे श्रमिक कर्ज और दरिद्रता में धकेल दिए गए, सीधे अधिनियम के समय पर भुगतान के प्रावधानों का उल्लंघन किया गया।
• आधार-लिंकिंग और तकनीकी गड़बड़ियाँ: भुगतान के लिए अनिवार्य आधार-लिंकिंग के कारण तकनीकी त्रुटियों, बायोमेट्रिक विफलताओं और दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता की कमी के कारण वास्तविक लाभार्थियों को बाहर कर दिया गया है।
• फोकस का कमजोर होना: मांग-आधारित काम से संपत्ति निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना, अक्सर पर्याप्त परामर्श या स्थानीय आवश्यकताओं के आकलन के बिना।
• मस्टर रोल में हेरफेर और भ्रष्टाचार: जबकि भाजपा के लिए यह अनूठा नहीं है, मस्टर रोल में भ्रष्टाचार और हेरफेर की खबरें बनी हुई हैं, जिसमें केंद्र सरकार की ओर से अपर्याप्त निगरानी है।
"मनरेगा में काम मिलना अब ऐसा है, जैसे लॉटरी जीतना। भाजपा ने इसे 'नरेगा' से 'नहिं-रेगा' बना दिया है!"
"मजदूरों को काम का वादा और बदले में आधार लिंक करने की मशक्कत। लगता है भाजपा को लगता है भूखे पेट 'डिजिटल इंडिया' ज्यादा समझ आता है।"
मनरेगा: संभावित समाधान (Congress की दृष्टि से)
1. रोजगार गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 150 दिन
ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती बेरोजगारी को देखते हुए रोजगार के दिनों में वृद्धि
2. शहरी मनरेगा योजना की शुरुआत
गरीब और प्रवासी शहरी मजदूरों के लिए भी रोजगार गारंटी योजना लागू करना
3. समय पर मजदूरी भुगतान की गारंटी
भुगतान की 15 दिन की सीमा का सख्ती से पालन और भुगतान में देरी पर दंड
4. बेरोजगारी भत्ते की प्रभावी व्यवस्था
समय पर रोजगार न मिलने पर स्वचालित बेरोजगारी भत्ते का भुगतान
5. महिलाओं की भागीदारी ≥ 50%
महिलाओं के लिए प्राथमिकता वाले कार्य, सुविधा युक्त कार्यस्थल और बच्चा देखभाल केंद्र
6. स्थानीय परिसंपत्तियों का निर्माण
जल संरक्षण, वृक्षारोपण, ग्रामीण सड़कों जैसे टिकाऊ कार्यों को प्राथमिकता
7. ग्राम सभा और सामाजिक ऑडिट को मज़बूत करना
पारदर्शिता, भ्रष्टाचार रोकने और स्थानीय भागीदारी बढ़ाने के लिए
8. डिजिटल उपकरणों और पोर्टलों की दक्षता में सुधार
कार्यस्थल जियो-टैगिंग, मोबाइल ऐप, MIS में सुधार, लेकिन डिजिटल भेदभाव से बचाव
9. मनरेगा बजट में स्थायी वृद्धि
योजना की मांग आधारित प्रकृति के अनुरूप पर्याप्त फंडिंग सुनिश्चित करना
10. स्थानीय प्रशासन को सशक्त करना
ग्राम पंचायतों को तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण और मानव संसाधन उपलब्ध कराना
In Brief About The Act
1. योजना का उद्देश्य:
मनरेगा का मूल उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका सुरक्षा प्रदान करना है. इसके तहत भारत सरकार हर ग्रामीण परिवार को प्रति वर्ष कम-से-कम 100 दिन का गारंटीड रोज़गार देती है, वह भी स्थानीय स्तर पर, अकुशल (unskilled) शारीरिक कार्य के रूप में.
2. पात्रता (Eligibility):
नागरिकता - भारतीय नागरिक
आयु - 18 वर्ष से अधिक
स्थान - ग्रामीण क्षेत्र में निवास
कौशल - अकुशल श्रमिक
3. पंजीकरण प्रक्रिया (Job Card Registration):
आवेदन:
• इच्छुक परिवार ग्राम पंचायत कार्यालय में आवेदन करते हैं.
• आवेदन में परिवार के सभी वयस्क सदस्यों का विवरण, आधार कार्ड, निवास प्रमाणपत्र और पासपोर्ट साइज फोटो संलग्न होता है.
जॉब कार्ड (Job Card):
• पात्र पाए जाने पर ग्राम पंचायत 15 दिनों के भीतर जॉब कार्ड जारी करती है.
• यह एक आधिकारिक दस्तावेज होता है जिसमें श्रमिक का नाम, फोटो, पता, परिवार के सदस्य, कार्य का रिकॉर्ड आदि होता है.
• यह 5 वर्षों के लिए वैध होता है, और निःशुल्क जारी किया जाता है.
4. रोजगार की मांग (Demanding Work):
• जॉब कार्डधारी लिखित या मौखिक आवेदन के जरिए ग्राम पंचायत में काम की मांग करता है.
• मांग दर्ज होते ही पंचायत को 15 दिन के भीतर रोजगार देना होता है.
अगर काम नहीं दिया जाता, तो श्रमिक को बेरोजगारी भत्ता (Unemployment Allowance) देना पड़ता है. यह संबंधित राज्य सरकार की ज़िम्मेदारी होती है.
5. कार्य का आवंटन और कार्य स्थल (Work Allocation):
कार्य का स्थान:
• कार्यस्थल घर से 5 किमी के भीतर होना चाहिए.
• यदि कार्य इससे दूर हो, तो श्रमिक को अतिरिक्त भत्ता (travel & living allowance) देना होगा.
कार्य की प्रकृति:
• केवल स्थानीय सार्वजनिक निर्माण कार्य होते हैं, जैसे:
• जल संरक्षण (check dams, ponds, etc.)
• भूमि सुधार (land levelling, contour trenches)
• सड़क निर्माण
• वृक्षारोपण
• सिंचाई नहरें
• कचरा प्रबंधन
• खेत तालाब आदि
6. मजदूरी भुगतान (Wage Payment):
भुगतान की प्रक्रिया:
• मजदूरी कार्य समाप्ति की तारीख से 15 दिनों के भीतर सीधे श्रमिक के बैंक खाते या पोस्ट ऑफिस खाते में भेजी जाती है.
• वर्तमान में भुगतान प्रक्रिया DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से होती है.
मजदूरी दर:
• प्रति राज्य राज्य सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम मजदूरी दर होती है.
• मजदूरी में लिंग आधारित भेदभाव वर्जित है. पुरुष और महिला श्रमिकों को समान वेतन देना अनिवार्य है.
7. पारदर्शिता और सामाजिक ऑडिट (Social Audit & Transparency):
सामाजिक ऑडिट:
• ग्राम पंचायत में हर 6 महीने या साल में सोशल ऑडिट कराना अनिवार्य है.
• सोशल ऑडिट में ग्रामवासी और जॉब कार्डधारी श्रमिक शामिल होते हैं. वे कार्य और भुगतान का सत्यापन करते हैं.
कार्यस्थल प्रबंधन:
• प्रत्येक कार्यस्थल पर मस्टर रोल (Attendance Register) रखना अनिवार्य है.
• कार्यस्थल पर श्रमिक सुरक्षा उपाय (जैसे पानी, प्राथमिक चिकित्सा, शौचालय आदि) भी अनिवार्य हैं.
8. शिकायत निवारण (Grievance Redressal):
• योजना में शिकायत निवारण तंत्र भी है. इसके अंतर्गत:
• ब्लॉक और जिला स्तर पर शिकायत अधिकारी होते हैं.
• टोल फ्री नंबर, शिकायत रजिस्टर और ऑनलाइन पोर्टल मौजूद हैं.
• शिकायतों को 7 से 30 दिन के भीतर हल किया जाना अनिवार्य है.
9. महिलाओं की भागीदारी:
• कार्यस्थल पर कम-से-कम 33% महिला श्रमिकों की भागीदारी अनिवार्य है.
• कई राज्यों में महिलाओं की भागीदारी 40-50% से भी अधिक है.
10. योजना के प्रबंधन हेतु मुख्य संस्थाएं:
ग्राम पंचायत - कार्य योजना बनाना, जॉब कार्ड जारी करना, कार्य देना
ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस - योजना का संचालन और निगरानी
जिला कार्यक्रम समन्वयक - पूरे जिले का निगरानी और बजट प्रबंधन
राज्य सरकार - मजदूरी दर तय करना, बजट मांगना
भारत सरकार (MoRD) - धनराशि आवंटन, दिशा-निर्देश, निगरानी, राष्ट्रीय डैशबोर्ड
11. योजना की तकनीकी विशेषताएं:
• NREGASoft: एक वेब आधारित MIS पोर्टल है जहाँ कार्य, भुगतान, मस्टर रोल, जॉब कार्ड आदि का रिकॉर्ड होता है.
• Aadhaar Seeding: जॉब कार्ड और बैंक खातों को आधार से जोड़ा जाता है ताकि भुगतान में पारदर्शिता बनी रहे.
• Geo-tagging of assets: सभी निर्मित परिसंपत्तियों (assets) की तस्वीर और GPS लोकेशन पोर्टल पर अपलोड होती है.