राजस्थान, कर्नाटक और तेलंगाना में सामाजिक सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक विधायी प्रयास
भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में लाखों गिग वर्कर्स की महत्वपूर्ण भूमिका है। स्विगी, ज़ोमैटो, उबर, ओला और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़े डिलीवरी पार्टनर तथा कैब ड्राइवर लंबे समय से रोजगार की अनिश्चितता, दुर्घटनाओं के जोखिम, सामाजिक सुरक्षा के अभाव और कंपनियों की मनमानी जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
इन चुनौतियों के समाधान के लिए राजस्थान, कर्नाटक और तेलंगाना की कांग्रेस सरकारों ने गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा और कल्याण प्रदान करने के उद्देश्य से विशेष कानूनों के माध्यम से महत्वपूर्ण पहल की है।
वर्ष 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने देश का पहला राजस्थान प्लेटफॉर्म आधारित गिग वर्कर्स (पंजीकरण एवं कल्याण) अधिनियम बनाया।
इस कानून में गिग वर्कर्स के पंजीकरण, वेलफेयर बोर्ड के गठन, सामाजिक सुरक्षा/कल्याण कोष और शिकायत निवारण की व्यवस्था की गई है। साथ ही, प्लेटफॉर्म कंपनियों से कल्याण शुल्क लेकर श्रमिकों की सुरक्षा और कल्याण के लिए संसाधन जुटाने का प्रावधान किया गया है।
प्रमुख विशेषताएँ:
• गिग वर्कर्स और एग्रीगेटर्स का पंजीकरण तथा Unique ID जारी करना।
• गिग वर्कर्स वेल्फेर बोर्ड की स्थापना।
• गिग वर्कर्स के लिए अलग वेलफेर फंड।
• एग्रीगेटर्स सेWelfare Feeलेने का प्रावधान।
• सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं के लिए कानूनी ढांचा।
• श्रमिकों के लिए शिकायत एवं अपील की व्यवस्था।
• वेलफेर बोर्डमें श्रमिकों का प्रतिनिधित्व।
• ऑनलाइन पंजीकरण तथा कल्याणकारी लाभ उपलब्ध कराने के लिए डिजिटल व्यवस्था।
डाउनलोड: अधिनियम की प्रति
मुख्यमंत्री श्री सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2025 में गिग वर्कर्स के अधिकारों और कल्याण के लिए कानून बनाया।
Karnataka Platform-Based Gig Workers (Social Security and Welfare) Act, 2025 को 11 सितंबर 2025 को राज्यपाल की मंजूरी मिली और इसे 30 मई 2025 से प्रभावी माना गया है।
कर्नाटक गिग वर्कर्स अधिनियम, 2025 — प्रमुख विशेषताएँ
• Unique ID: प्रत्येक पंजीकृत गिग वर्कर को एक विशिष्ट पहचान संख्या दी जाती है, जो विभिन्न प्लेटफॉर्म पर मान्य होती है।
• Welfare Board: गिग वर्कर्स, प्लेटफॉर्म/एग्रीगेटर्स और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों वाला Welfare Board।
• Social Security & Welfare Fund: गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान करने के लिए अलग कोष।
• 1%–5% Welfare Fee: प्रत्येक लेन-देन में श्रमिक को किए गए भुगतान (Payout) का1% से 5% तक Welfare Feeएग्रीगेटर द्वारा दिया जाना।
• स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा: स्वास्थ्य देखभाल और आय-सुरक्षा से संबंधित योजनाएँ बनाने का प्रावधान।
• निष्पक्ष अनुबंध (Fair Contracts): भुगतान, कटौती, प्रोत्साहन (Incentives) और अनुबंध की अन्य शर्तों की स्पष्ट जानकारी देने की व्यवस्था।
• काम स्वीकार या अस्वीकार करने का अधिकार: श्रमिक को दिए गए कार्य को स्वीकार या अस्वीकार करने का अधिकार।
• Algorithmic Transparency: श्रमिकों को उनकी रेटिंग, कमाई, किराए तथा उनके काम को प्रभावित करने वाली स्वचालित निर्णय लेने वाली प्रणालियों के संबंध में जानकारी प्राप्त करने का अधिकार।
• Deactivation से सुरक्षा:किसी श्रमिक को प्लेटफॉर्म से निष्क्रिय (Deactivate) करने के लिए लिखित कारण देना होगा और सामान्यतः 14 दिन का पूर्व नोटिस देना होगा।
• शिकायत निवारण: आंतरिक विवाद समाधान, शिकायत निवारण और अपील की व्यवस्था।
• डिजिटल निगरानी: श्रमिकों को किए गए भुगतान और Welfare Fee कोPayment and Welfare Fee Verification System (PWFVS)के माध्यम से ट्रैक करने की व्यवस्था।
संक्षेप में
कर्नाटक का कानून केवल Welfare Fund के गठन तक सीमित नहीं है। इसमें सामाजिक सुरक्षा, निष्पक्ष अनुबंध, Deactivation की प्रक्रिया, Algorithmic Transparency और शिकायत निवारण जैसे श्रमिक अधिकारों को भी शामिल किया गया है।
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मुख्यमंत्री श्री ए. रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2026 में गिग वर्कर्स के पंजीकरण, सामाजिक सुरक्षा और कल्याण के लिए कानून बनाया, जो 2 जून 2026 से प्रभावी हुआ।
इस कानून में प्रत्येक श्रमिक कोUnique ID, Welfare Board, Social Security and Welfare Fund, शिकायत निवारण की व्यवस्था तथा प्लेटफॉर्म कंपनियों की जवाब दे ही सुनिश्चित करने के प्रावधान हैं। श्रमिकों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए पंजीकरण की व्यवस्था भी की गई है।
तेलंगाना: गिग वर्कर्स की प्रमुख विशेषताएँ
• कानूनी पहचान: सभी गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के पंजीकरण तथाUnique IDजारी करने का प्रावधान।
• Welfare Board: गिग वर्कर्स के लिए अलगSocial Security and Welfare Boardकी स्थापना।
• Welfare Fund: कल्याण कोष बनाने के लिए प्लेटफॉर्म/एग्रीगेटर्स से प्रत्येक लेन-देन पर1%–2% तक योगदानलेने का प्रावधान।
• सामाजिक सुरक्षा: दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य/बीमा सहायता, पेंशन, मातृत्व लाभ तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का प्रावधान।
• न्यूनतम मजदूरी: जून 2026 से तेलंगाना में गिग वर्कर्स को न्यूनतम मजदूरी के दायरे में लाने के लिए वेतन संबंधी प्रावधान लागू किए गए।
• शिकायत निवारण: श्रमिकों की शिकायतों के समाधान के लिए औपचारिक व्यवस्था।
• Algorithmic Transparency:काम के आवंटन, भुगतान, रेटिंग तथा अन्य कार्य-संबंधी मामलों को प्रभावित करने वाली स्वचालित निर्णय लेने वाली प्रणालियों के संबंध में जानकारी मांगने का अधिकार।
• महिलाओं एवं दिव्यांग व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व: कल्याण व्यवस्था में महिलाओं और दिव्यांग व्यक्तियों के प्रतिनिधित्व का प्रावधान।
• Aggregator Accountability:प्लेटफॉर्म कंपनियों का पंजीकरण तथा कल्याण संबंधी योगदान अनिवार्य किया गया है। उल्लंघन की स्थिति में दंड का भी प्रावधान है।
• Digital Records:सरकार ने गिग वर्कर्स का व्यापक डिजिटल डेटाबेस तैयार करने पर भी जोर दिया है।
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