भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार (नियोजन तथा सेवा-शर्त विनियमन) अधिनियम, 1996

अधिनियम के बारे में: भवन और अन्य निर्माण श्रमिकों के रोजगार और सेवा की शर्तों को विनियमित करने, उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण उपायों के लिए प्रदान करने और उससे जुड़े अन्य मामलों के लिए अधिनियमित किया गया। यह कल्याण बोर्डों के निर्माण को अनिवार्य करता है।

किसने बनाया: संयुक्त मोर्चा सरकार (पी.वी. नरसिम्हा राव सरकार के कार्यकाल के दौरान, हालांकि बिल उनके सरकार के अंतिम महीनों में पारित किया गया था, यह काफी हद तक एक आम सहमति-आधारित अधिनियम था)।

लाभ: निर्माण परियोजनाओं से एकत्र किए गए सेस (उपकर) के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा लाभ, सुरक्षा विनियमन और कल्याणकारी उपाय (जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास) प्रदान करना।

संशोधन (भाजपा के तहत): भाजपा सरकार ने इस अधिनियम को व्यापक व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता, 2020 के तहत शामिल करने का प्रयास किया है, जिसका आलोचक तर्क देते हैं कि यह निर्माण श्रमिकों के लिए विशिष्ट सुरक्षा को कमजोर करता है।

वर्तमान विफलताएं: श्रमिकों का अपर्याप्त पंजीकरण, सेस फंड का खराब संग्रह और उपयोग, श्रमिकों के बीच जागरूकता की कमी और कमजोर प्रवर्तन तंत्र।
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BOCW अधिनियम मज़दूरों का अधिकार था, भाजपा ने उसे सिस्टम की फाइल बना दिया
मज़दूरों का हक़ BJP को दिखता नहीं, क्योंकि उन्होंने ‘Make in India’ चश्मा पहन रखा है!
BOCW मतलब – 'BJP Only Cares for Wealthy'

भाजपा कैसे असफल रही:
• कल्याण बोर्डों का अप्रभावी कार्यान्वयन: कल्याण बोर्ड अक्सर निष्क्रिय रहते हैं, जिनमें महत्वपूर्ण अप्रयुक्त सेस फंड होते हैं, जिससे श्रमिकों को उनके वैध लाभ से वंचित किया जाता है।
• खराब पंजीकरण और पहुंच: बड़ी संख्या में निर्माण श्रमिक अपंजीकृत रहते हैं, जिससे वे लाभ के लिए अपात्र हो जाते हैं, जो सरकार की पहुंच और जागरूकता अभियानों में विफलता को उजागर करता है।
• नए श्रम संहिताओं के माध्यम से कमजोर करना: इस अधिनियम को एक व्यापक संहिता में समेकित करने का प्रयास एक अत्यधिक कमजोर कार्यबल के लिए विशिष्ट, बहुत आवश्यक सुरक्षा को कमजोर करने के लिए एक कदम के रूप में देखा जाता है।
• मजबूत प्रवर्तन का अभाव: सुरक्षा विनियमों का ढीला प्रवर्तन निर्माण स्थलों पर उच्च दुर्घटना दर और मौतों का कारण बनता रहता है।

संभावित समाधान (Congress की दृष्टि से)

1. श्रमिक पंजीकरण का सार्वभौमिक अभियान:
• हर ज़िले में BOCW मोबाइल पंजीकरण अभियान
• मनरेगा, निर्माण परियोजनाओं और पंचायतों से डाटा सिंक्रोनाइजेशन

2. डिजिटल लेबर आईडी और पोर्टेबिलिटी:
• एक स्मार्ट श्रमिक कार्ड, जो पूरे भारत में मान्य हो
• सभी योजनाएं एक पोर्टल से जोड़ना – “One Nation, One Labour Card”

3. BOCW फंड का पारदर्शी उपयोग:
• RTI, सोशल ऑडिट और लाभार्थी पोर्टल द्वारा निगरानी
• लाभार्थियों को सीधे DBT के माध्यम से भुगतान

4. स्वास्थ्य, बीमा और आवास की गारंटी:
• मुफ्त बीमा, स्वास्थ्य सेवा, दुर्घटना मुआवज़ा, और मातृत्व सहायता
• BOCW फंड से मजदूर कॉलोनी/आवास योजना लागू

5. शिक्षा एवं छात्रवृत्ति योजना:
• बच्चों को स्कूल एड सपोर्ट, छात्रवृत्ति, और डिजिटल उपकरण
• उच्च शिक्षा के लिए BOCW स्कॉलरशिप स्कीम

6. महिला श्रमिकों के लिए विशेष प्रावधान:
• कार्यस्थल पर क्रेच, शौचालय, और मातृत्व अवकाश
• महिला श्रमिकों को विशेष स्वास्थ्य चेकअप और सुरक्षा किट

7. कौशल उन्नयन और स्थायी रोजगार:
• NSDC के साथ कौशल विकास साझेदारी
• स्थायी निर्माण श्रमिक रजिस्टर बनाना, ताकि काम की नियमितता बनी रहे

8. ठेकेदारों की जवाबदेही और निगरानी:
• ठेकेदारों के लिए पंजीकरण अनिवार्य
• फर्जी बिलिंग, फंड गबन पर दंडात्मक कार्रवाई

9. राज्य BOCW बोर्डों में लोकतांत्रिक भागीदारी:
• हर बोर्ड में पंजीकृत मजदूर संगठनों का प्रतिनिधित्व अनिवार्य

In Brief About The Act

भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार (नियोजन तथा सेवा-शर्त विनियमन) अधिनियम, 1996
(The Building and Other Construction Workers (Regulation of Employment and Conditions of Service) Act, 1996)
यह अधिनियम असंगठित क्षेत्र के निर्माण मजदूरों के कल्याण और सुरक्षा के लिए संसद द्वारा पारित एक प्रमुख कानून है

अधिनियम का उद्देश्य:
• भवन और अन्य सन्निर्माण कार्यों में लगे मजदूरों की नियोजन, सुरक्षा, स्वास्थ्य, और सेवा-शर्तों को विनियमित
• इन मजदूरों के कल्याण के लिए एक समर्पित वेलफेयर बोर्ड की स्थापना
• श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करना

किस पर लागू होता है?
• यह अधिनियम उन सभी प्रतिष्ठानों पर लागू होता है जहाँ 10 या अधिक निर्माण श्रमिक कार्यरत हों
• निर्माण कार्य में भवन निर्माण, सड़क, पुल, बांध, सुरंग, नहर, ड्रेनेज, बिजली आपूर्ति जैसे कार्य शामिल हैं

मुख्य प्रावधान:

1. पंजीकरण (Registration):
• सभी निर्माण मजदूरों को राज्य वेलफेयर बोर्ड में पंजीकरण कराना होता है
• न्यूनतम 18 वर्ष और अधिकतम 60 वर्ष की आयु के श्रमिक पंजीकृत हो सकते हैं
• कम से कम 90 दिन कार्य करने का प्रमाण आवश्यक होता है

2. राज्य भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (Welfare Board):
• प्रत्येक राज्य सरकार एक कल्याण बोर्ड स्थापित करती है
• यह बोर्ड श्रमिकों के लिए योजनाएँ चलाता है जैसे:
• स्वास्थ्य सहायता
• मृत्यु/दुर्घटना बीमा
• पेंशन
• बच्चों की शिक्षा
• आवास सहायता
• मातृत्व लाभ

3. सेवा शर्तें और सुरक्षा उपाय:
• निर्माण स्थल पर काम की सुरक्षा, स्वच्छता, पीने का पानी, और प्राथमिक उपचार जैसे प्रावधान अनिवार्य हैं
• श्रमिकों के लिए प्रशिक्षण, उपकरण, और कार्यस्थल पर सुरक्षा मानक सुनिश्चित किए जाते हैं

4. संकलन (Cess) और फंडिंग:
• ठेकेदार/निर्माता को निर्माण लागत का 1% तक श्रमिक उपकर (Cess) देना होता है
• यही राशि वेलफेयर बोर्ड द्वारा श्रमिक कल्याण के लिए उपयोग होती है

मख्य समस्याएँ / चुनौतियाँ:
• कई राज्यों में श्रमिकों का पंजीकरण बहुत कम है
• करोड़ों रुपए फंड में पड़े हैं लेकिन उपयोग नहीं हो रहा
• ठेकेदार और कंपनियाँ उपकर जमा नहीं कराते
• योजना का प्रचार और जागरूकता बेहद कम है