उनकी स्थिति के बारे में: घरेलू कामगार बड़े पैमाने पर कार्यबल का एक अपरिचित और असुरक्षित वर्ग बने हुए हैं, जिनके लिए उनकी सुरक्षा के लिए कोई व्यापक राष्ट्रीय कानून नहीं है। वे अक्सर शोषित होते हैं, न्यूनतम मजदूरी से वंचित होते हैं और सामाजिक सुरक्षा का अभाव होता है।
किसने बनाया: कोई विशिष्ट व्यापक केंद्रीय अधिनियम नहीं। विभिन्न राज्य-स्तरीय पहल मौजूद हैं, लेकिन एक राष्ट्रीय ढांचा अनुपस्थित है। पिछली सरकारों ने कानून का प्रस्ताव किया था, लेकिन इसे अधिनियमित नहीं किया गया।
लाभ: एक राष्ट्रीय कानून न्यूनतम मजदूरी, विनियमित काम के घंटे, सामाजिक सुरक्षा लाभ (पीएफ, ईएसआई) और दुर्व्यवहार के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करेगा।
संशोधन: लागू नहीं क्योंकि कोई केंद्रीय अधिनियम मौजूद नहीं है।
वर्तमान विफलताएं: एक समर्पित कानून का अभाव, उनके काम की अदृश्यता, शोषण के प्रति संवेदनशीलता, सौदेबाजी की शक्ति की कमी और अधिकांश श्रम कानूनों से बहिष्कार।
जब घरेलू कामगारों को न तो उचित वेतन मिलता है और न ही कोई सामाजिक सुरक्षा, तब भाजपा का ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा बस खोखला दिखता है
भाजपा कैसे असफल रही:
लगातार उपेक्षा और निष्क्रियता: कई मांगों और सिफारिशों के बावजूद, भाजपा सरकार घरेलू कामगारों की सुरक्षा के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय कानून लाने में विफल रही है, जिससे लाखों लोग कमजोर स्थिति में रह गए हैं।
सामाजिक सुरक्षा से बहिष्कार: घरेलू कामगार, अर्थव्यवस्था में उनके महत्वपूर्ण योगदान के बावजूद, मुख्यधारा की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से बड़े पैमाने पर बाहर हैं।
क्षेत्र को विनियमित करने में विफलता: सरकार ने घरेलू कामगारों के लिए रोजगार एजेंसियों को विनियमित करने में कोई पर्याप्त प्रगति नहीं की है, जिससे निरंतर शोषण और तस्करी हो रही है।
मान्यता का अभाव: सरकार की नीतियां घरेलू काम को औपचारिक श्रम के रूप में पर्याप्त रूप से मान्यता नहीं देती हैं, जिससे उनकी अनौपचारिक स्थिति और संबंधित कमजोरियां बनी रहती हैं।
संभावित समाधान (Congress की दृष्टि से)
1. राष्ट्रीय स्तर पर समग्र अधिनियम बनाए जाएं
• घरेलू कामगारों के लिए एक राष्ट्रीय स्तर पर लागू होने वाला समग्र कानून तैयार किया जाए, जो सभी राज्यों में समान रूप से उनके अधिकारों, पंजीकरण, न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा और शिकायत निवारण की गारंटी दे
2. पंजीकरण प्रक्रिया को सुलभ और अनिवार्य बनाया जाए
• सभी घरेलू कामगारों का पंजीकरण नि:शुल्क और आसान बनाया जाए, जिससे उनका डेटा सरकार के पास सुरक्षित रहे और उन्हें कल्याण योजनाओं का लाभ मिल सके
• पंजीकरण को स्थानीय स्तर पर पंचायत, वार्ड, या नगर निगम कार्यालय से उपलब्ध कराया जाए
3. न्यूनतम वेतन और कार्य-शर्तों का निर्धारण
• घरेलू कामगारों के लिए न्यूनतम वेतन, दैनिक कार्य समय, छुट्टियाँ और ओवरटाइम भुगतान का स्पष्ट प्रावधान किया जाए
• इनके उल्लंघन पर कड़ी सजा और दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित हो
4. सामाजिक सुरक्षा और कल्याण योजनाओं का विस्तार
• घरेलू कामगारों को स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा, मातृत्व लाभ, पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में शामिल किया जाए
• इनके लिए विशेष पुनर्वास और कौशल विकास कार्यक्रम शुरू किए जाएं
5. शिकायत निवारण और सुरक्षा तंत्र मजबूत किया जाए
• घरेलू कामगारों के लिए सुलभ, त्वरित और निष्पक्ष शिकायत निवारण प्रणाली विकसित की जाए
• कामगारों के खिलाफ शोषण, उत्पीड़न और यौन हिंसा के मामलों में शीघ्र न्याय सुनिश्चित हो
6. जागरूकता और सशक्तिकरण अभियान चलाए जाएं
• घरेलू कामगारों को उनके अधिकारों और उपलब्ध कल्याण योजनाओं के प्रति जागरूक करने हेतु व्यापक अभियान चलाए जाएं
• स्थानीय स्तर पर ट्रेड यूनियनों, स्वयंसेवी संस्थाओं और महिला समूहों को सहयोग दिया जाए
7. मान्यता और सामाजिक सम्मान बढ़ाया जाए
• घरेलू कामगारों के योगदान को समाज में मान्यता दी जाए और उन्हें सम्मानजनक कार्यस्थल सुनिश्चित किया जाए
• उनके साथ हो रहे भेदभाव और उपेक्षा को खत्म करने के लिए अभियान चलाएं
8. राज्य सरकारों के साथ समन्वय बढ़ाया जाए
• राज्यों को प्रोत्साहित किया जाए कि वे घरेलू कामगारों के संरक्षण हेतु उपयुक्त कानून बनाएं और राष्ट्रीय नीतियों का पालन करें
• राज्यों के अनुभवों से सीख लेकर बेहतर नीति निर्माण किया जाए है।
In Brief About The Act
घरेलू कामगार संरक्षण अधिनियम — विस्तृत विवरण
1. परिचय:
भारत में घरेलू कामगारों के अधिकारों, सुरक्षा और कल्याण के लिए विभिन्न स्तरों पर कानून बनाए गए हैं. हालांकि अभी तक केंद्र सरकार स्तर पर एक समग्र घरेलू कामगार कानून नहीं है, लेकिन कई राज्य सरकारों ने घरेलू कामगारों के अधिकारों और कल्याण के लिए अलग-अलग अधिनियम बनाए हैं, साथ ही भारत में घरेलू कामगारों के हितों की रक्षा हेतु “Domestic Workers (Registration, Social Security and Welfare) Bill” जैसी पहल भी की गई हैं
2. प्रमुख प्रावधान और उद्देश्य:
• घरेलू कामगारों को उनके रोजगार में न्यायसंगत वेतन, सामाजिक सुरक्षा, काम के घंटे, आराम और छुट्टियों की गारंटी देना
• उन्हें शोषण, उत्पीड़न, शारीरिक एवं मानसिक हिंसा से सुरक्षा प्रदान करना
• कामगारों के पंजीकरण का प्रावधान, जिससे उनकी पहचान और अधिकार सुनिश्चित हो
• श्रमिक कल्याण बोर्ड का गठन, जो घरेलू कामगारों के हितों की रक्षा करे
• कामगारों को बीमा, चिकित्सा सुविधा, शिक्षा और पुनर्वास की सुविधा देना
3. घरेलू कामगारों की परिभाषा:
• वे व्यक्ति जो घरेलू परिवारों के लिए घरेलू कार्य करते हैं, जैसे कि झाड़ू-पोछा करना, खाना बनाना, बच्चों या बुजुर्गों की देखभाल, सिलाई, सफाई आदि
• ये कामगार असंगठित क्षेत्र में आते हैं और अक्सर बिना किसी लिखित अनुबंध के काम करते हैं
4. राज्य स्तरीय अधिनियम (उदाहरण):
1. केरल
• Kerala Domestic Workers Welfare and Social Security Act, 2011
केरल पहला राज्य था जिसने घरेलू कामगारों के लिए व्यापक संरक्षण अधिनियम बनाया. इसमें पंजीकरण, न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा की व्यवस्था शामिल है
2. दिल्ली
• Delhi Domestic Workers Welfare and Social Security Act, 2017
दिल्ली सरकार ने घरेलू कामगारों के अधिकारों की रक्षा हेतु यह कानून बनाया, जिसमें सेवा शर्तों, पंजीकरण और शिकायत निवारण की व्यवस्था है.
3. तमिलनाडु
• तमिलनाडु में घरेलू कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा और पंजीकरण संबंधी नियम लागू हैं, हालांकि पूर्ण अधिनियम अभी विकासाधीन है.
4. महाराष्ट्र
• महाराष्ट्र में घरेलू कामगारों के लिए श्रम नियमों और कल्याण योजनाओं का प्रावधान है, लेकिन समग्र अधिनियम अभी नहीं बना.
5. पश्चिम बंगाल
• पश्चिम बंगाल में घरेलू कामगारों के हितों की सुरक्षा हेतु सामाजिक सुरक्षा योजनाएं संचालित हैं.
6. कर्नाटक
• कर्नाटक में भी घरेलू कामगारों के लिए पंजीकरण और सामाजिक सुरक्षा संबंधित नियम बनाए गए हैं.
7. उत्तर प्रदेश
• उत्तर प्रदेश में घरेलू कामगारों के पंजीकरण और कल्याण के लिए कुछ स्थानीय स्तर पर प्रावधान हैं, लेकिन समग्र राज्य अधिनियम नहीं है.
5. मुख्य अधिकार एवं सुरक्षा:
• न्यूनतम वेतन: प्रत्येक राज्य में निर्धारित न्यूनतम वेतन का अधिकार.
• काम के घंटे: दैनिक व साप्ताहिक काम के घंटे तय, ओवरटाइम भुगतान.
• आराम एवं छुट्टियाँ: सप्ताहिक अवकाश, राष्ट्रीय अवकाश और छुट्टियाँ
• शोषण से सुरक्षा: शारीरिक, मानसिक उत्पीड़न से संरक्षण.
• स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा: बीमा, चिकित्सा सुविधा, पेंशन योजनाओं में शामिल होना.