मजदूर अधिकार बचाओ दिवस

01 May, 2026

दिनांक 08 मई 2026 को इंदिरा भवन (नया काँग्रेस मुख्यालय), दिल्ली, के सभागार में असंगठित कामगार एवं कर्मचारी कांग्रेस (केकेसी) की दिल्ली इकाई द्वारा मजदूर अधिकार बचाओ दिवस मनाया गया, जिसमें मुख्य रूप से दिल्ली और हरियाणा के पदाधिकारी और असंगठित कामगारों के विभिन्न सेक्टरों जैसे – निर्माण मजदूर यूनियन, ऑटो टैक्सी यूनियन, आशा वर्कर्स, रेहड़ी पटरी, गिग वर्कर्स आदि के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस अवसर पर केकेसी के राष्ट्रीय चेयरमैन डॉ. उदित राज के अलावा अखिल भारतीय महिला कॉंग्रेस की अध्यक्ष, श्रीमती अल्का लांबा, दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री देवेन्द्र यादव ने कार्यक्रम मे पहुंचकर कामगारों और इसके प्रतिनिधियों का हौसला बढ़ाया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केकेसी के राष्ट्रीय चेयरमैन, डॉ. उदित राज जी ने कहा कि हाल में नोएडा, मानेसर, नीमराना, फरीदाबाद और अन्य स्थानों पर बड़े स्तर पर असंगठित श्रमिकों ने आंदोलन किए। परिणामस्वरूप हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकारें जागीं और उन्होंने वेतन वृद्धि की घोषणा की। देश के लगभग 94% कामगार असंगठित क्षेत्र में हैं, लेकिन मोदी सरकार ने इनके शोषण को रोकने के बजाय बढ़ाने का काम किया है। यूपीए सरकार द्वारा इनके कल्याण के लिए किए गए कार्यों पर न केवल विराम लगा, बल्कि पूंजीपतियों के हित में चार लेबर कोड्स 1 अप्रैल 2026 से लागू कर दिए गए।
उन्होंने आगे कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने असंगठित क्षेत्र के उद्यमों के लिए “नेशनल कमीशन फॉर एंटरप्राइजेज इन द अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर (NCEUS)” का गठन सितंबर 2004 में डॉ. अर्जुन सेनगुप्ता की अध्यक्षता में किया था। इसका मुख्य उद्देश्य असंगठित क्षेत्र (जो 90% से अधिक रोजगार प्रदान करता है) के श्रमिकों और सूक्ष्म उद्यमों की समस्याओं, जैसे सामाजिक सुरक्षा की कमी और ऋण प्राप्त करने में कठिनाई का अध्ययन कर समाधान सुझाना था। आयोग का उद्देश्य ऐसी योजनाएँ और नीतियाँ बनाना था, जो अनौपचारिक श्रमिकों के लिए पेंशन, स्वास्थ्य बीमा और प्रसूति लाभ सुनिश्चित कर सकें। साथ ही, छोटे व्यवसायों को वित्त और तकनीक उपलब्ध कराने तथा औपचारिक और अनौपचारिक क्षेत्रों के बीच समन्वय बढ़ाकर उत्पादकता और रोजगार में वृद्धि करना भी इसका लक्ष्य था। आयोग ने अपनी महत्वपूर्ण रिपोर्टों के माध्यम से असंगठित श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा की वकालत की, जिसके परिणामस्वरूप भारत सरकार ने “असंगठित श्रमिक सामाजिक सुरक्षा अधिनियम, 2008” पारित किया। ई-श्रम पोर्टल की अवधारणा भी इसी दिशा में की गई सिफारिशों का परिणाम है। NCEUS को प्रारंभ में 3 वर्षों के लिए गठित किया गया था, लेकिन इसका कार्यकाल 2009 तक बढ़ाया गया। परिणाम स्वरूप आयोग ने अपनी रिपोर्टों के माध्यम से असंगठित श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालाँकि, आयोग का कार्यकाल 2009 में समाप्त हो गया और बाद की सरकारों ने इसकी कई सिफारिशों को नजरअंदाज कर दिया। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत विभिन्न योजनाओं—जैसे ई-श्रम पोर्टल और राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा कोष के माध्यम से इसकी भूमिका निभाने का प्रयास किया गया, लेकिन इनका प्रभाव अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुँच पाया। आज भी जमीनी स्तर पर श्रमिकों के शोषण के कई उदाहरण सामने आते हैं, जो दर्शाते हैं कि नीतियों और उनके क्रियान्वयन के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है।
डॉ. भीमराव अंबेडकर ने बिल्कुल सही कहा था कि भारत में जाति व्यवस्था केवल “श्रम का विभाजन” (Division of Labour) नहीं है, बल्कि “श्रमिकों का विभाजन” (Division of Labourers) भी है। उनका मानना था कि भारतीय समाज में काम के आधार पर जातियों का बंटवारा नहीं है, बल्कि जन्म के आधार पर जातियों को काम सौंपा गया है, जो श्रमिकों के बीच असमानता और शोषण पैदा करता है।
मोदी सरकार ने एक और खतरनाक स्थिति पैदा कर दी है कि श्रमिक न केवल जाति के आधार पर बँटे हुए हैं, बल्कि अब धर्म के आधार पर भी बँट गए हैं। ये मुख्य कारण हैं, जिनकी वजह से इतने भयंकर शोषण के बावजूद मजदूर एक नहीं हो पाते हैं। दुनिया के कई देशों में मजदूरों ने क्रांति की, लेकिन भारत में ऐसा नहीं हो सका। अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष श्रीमती अल्का लांबा जी ने अपने संबोधन में कहा कि श्रमशक्ति ही राष्ट्र की उन्नति का आधार है । देश की बेटियां, महिलाएं सुरक्षित नहीं है देश में ऐसी सरकार है जो बेटी बचाओ का नारा देकर बेटियों को नहीं अपराधियों को बचाने के लिए पैरोल और बेल पर छोड़कर वोटों की खातिर राजनीति करती है। मजदूर, जवान और किसान इन तीनों की लड़ाई हम सब को मिलकर लड़नी है।
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री देवेन्द्र यादव जी ने केकेसी दिल्ली प्रदेश की पहल की सराहना करते हुए कहा कि “श्रमशक्ति ही राष्ट्रशक्ति की आधारशिला है।” उन्होंने कहा कि देश के निर्माण में श्रमिक वर्ग की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है, लेकिन आज वही वर्ग महंगाई, असुरक्षा और अधिकारों के हनन जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। कांग्रेस पार्टी हमेशा श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा और उनके सम्मान के लिए प्रतिबद्ध रही है और आगे भी उनके हितों के लिए संघर्ष करती रहेगी।
कार्यक्रम मे श्री रमेश कुमार यादव - राष्ट्रीय वाइस चेयरमैन, श्री नवाब शेख इब्राहिम - राष्ट्रीय वाइस चेयरमैन, श्री संजय गाबा - राष्ट्रीय वाइस चेयरमैन, श्री सुखबीर शर्मा - राष्ट्रीय वाइस चेयरमैन, एड. शाहिद अली - राष्ट्रीय सचिव, सी.ए. वेणुगोपाल स्वामी - राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर, श्री एन. विजय कुमार- राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर, श्री आदित्य राजपूत- राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर, श्रीमती सोनिया राणा - राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, श्रीमती शीबा रामचंद्रन - राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, श्री रमेश मदान - राष्ट्रीय सलाहकार, श्री नरेश मलिक - हरियाणा प्रदेश चेयरमैन, श्री विनोद पवार - दिल्ली प्रदेश चेयरमैन, ए. पी. उस्मान (केरल) आदि ने भाग लिया।